AI और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से देश में डेटा सेंटरों की बिजली मांग 800% बढ़ने का अनुमान
भारत में डिजिटल सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते उपयोग के कारण आने वाले वर्षों में डेटा सेंटरों की बिजली खपत में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार साल 2031-32 तक देश में डेटा सेंटरों को करीब 13.56 गीगावॉट बिजली की जरूरत पड़ सकती है, जो वर्तमान मांग की तुलना में लगभग 800% अधिक होगी।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI आधारित सेवाओं के तेजी से बढ़ते उपयोग ने डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की जरूरत को कई गुना बढ़ा दिया है। यही कारण है कि कंपनियां तेजी से नए डेटा सेंटर स्थापित कर रही हैं और इसके साथ बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
| वर्ष | अनुमानित बिजली मांग |
|---|---|
| वर्तमान समय | लगभग 1.7 गीगावॉट |
| 2027-28 अनुमान | 5–6 गीगावॉट |
| 2031-32 अनुमान | 13.56 गीगावॉट |
| कुल वृद्धि | लगभग 800% |
AI और क्लाउड सेवाओं से बढ़ी मांग
आज के समय में कंपनियां बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही हैं। AI मॉडल को ट्रेन करने, डेटा प्रोसेस करने और बड़ी मात्रा में जानकारी स्टोर करने के लिए शक्तिशाली सर्वर की जरूरत होती है।
इसी वजह से डेटा सेंटरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बड़े टेक प्लेटफॉर्म और डिजिटल कंपनियां लगातार नई सुविधाएं और सर्वर क्षमता बढ़ा रही हैं ताकि यूजर्स को तेज और भरोसेमंद सेवाएं मिल सकें।
डिजिटल इंडिया और इंटरनेट उपयोग भी कारण
भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, डिजिटल पेमेंट और ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इन सभी सेवाओं के पीछे बड़े डेटा सेंटर काम करते हैं जो यूजर्स की जानकारी को स्टोर और प्रोसेस करते हैं।
सरकार की डिजिटल योजनाएं और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार भी डेटा स्टोरेज की जरूरत को बढ़ा रहा है। इससे आने वाले समय में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की संभावना है।
ऊर्जा क्षेत्र के लिए नई चुनौती
डेटा सेंटरों की बिजली जरूरत बढ़ने से ऊर्जा क्षेत्र के सामने नई चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मांग को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन और ऊर्जा प्रबंधन की मजबूत योजना बनानी होगी।
कई कंपनियां अब डेटा सेंटरों के लिए सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही हैं, ताकि बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ पर्यावरण पर असर कम किया जा सके।
निष्कर्ष
भारत में डिजिटल तकनीक और AI के तेजी से विस्तार के कारण डेटा सेंटरों की बिजली मांग आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ सकती है। 2031-32 तक 13.56 गीगावॉट की जरूरत इस बात का संकेत है कि देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार होगा। इसके लिए ऊर्जा क्षेत्र और टेक कंपनियों को मिलकर मजबूत और टिकाऊ समाधान तैयार करने होंगे।